Sarso Taza Rate: किसान भाइयों के लिए सरसों का भाव जानना बहुत ज़रूरी होता है क्योंकि यही तय करता है कि मेहनत की फसल का असली मुनाफा कितना मिलेगा। देश के अलग अलग राज्यों में सरसों के दाम रोज़ बदलते रहते हैं। कभी बारिश का असर होता है तो कभी मंडी में माल की कमी या ज़्यादा होने से दाम ऊपर नीचे जाते हैं। आज हम बात करेंगे कि भारत में सरसों का ताज़ा भाव क्या चल रहा है और कौन सी मंडी में सबसे अच्छा रेट मिल रहा है।
भारत में आज सरसों का औसत भाव
आज भारत में सरसों का औसत भाव ₹6950 प्रति क्विंटल चल रहा है। यानी अगर 1 किलो की बात करें तो ₹69.5 के आसपास दाम मिल रहे हैं। पश्चिम बंगाल की कंडी मंडी में आज सरसों का सबसे ऊंचा भाव ₹6950 प्रति क्विंटल दर्ज किया गया है। वहीं कई जगहों पर न्यूनतम भाव ₹6900 से लेकर ₹7000 तक देखने को मिला। किसान भाइयों के लिए यह राहत की बात है कि पिछले कुछ दिनों की तुलना में आज के दाम थोड़े स्थिर हैं। मौसम की स्थिति और मंडी में आवक दोनों ने आज के रेट को संतुलित रखा है।
विभिन्न राज्यों में सरसों के रेट में अंतर क्यों होता है?
हर राज्य में सरसों की फसल की गुणवत्ता, उत्पादन मात्रा और मांग अलग होती है। यही वजह है कि मंडियों में रेट भी बदलते रहते हैं। उदाहरण के तौर पर पश्चिम बंगाल में आज सरसों का भाव ₹6950 प्रति क्विंटल है, जबकि उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में ₹6910 तक रेट पहुंचा है। राजस्थान और हरियाणा की मंडियों में दाम कभी कभी ज्यादा मिल जाते हैं क्योंकि वहां तेल मिलें बड़ी मात्रा में सरसों खरीदती हैं। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट लागत और स्थानीय मांग भी कीमतों को प्रभावित करती है।
सरसों की कीमतों पर असर डालने वाले मुख्य कारण
- मौसम का असर सबसे बड़ा कारण है क्योंकि ज्यादा बारिश या सूखा फसल को नुकसान पहुंचाता है।
- सरकारी नीतियां और न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी भी रेट तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
- वैश्विक बाजार में खाने के तेल की कीमतें बढ़ने या घटने पर भी सरसों की मांग में बदलाव आता है।
- मंडी में आने वाली आवक जितनी ज्यादा होगी, दाम उतने ही नीचे जा सकते हैं।
- इन सभी कारणों की वजह से रोज़ाना सरसों के भाव में थोड़ा बहुत फर्क देखने को मिलता है।
आने वाले दिनों में सरसों के रेट क्या हो सकता है?
किसान विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ हफ्तों में सरसों के भाव स्थिर रह सकते हैं। मंडी में फिलहाल पर्याप्त आवक है और मांग भी सामान्य है। अगर मौसम अनुकूल रहा तो रेट में बड़ा बदलाव नहीं होगा। हालांकि सर्दियों की शुरुआत के साथ सरसों तेल की खपत बढ़ जाती है, जिससे दाम में हल्का इजाफा देखने को मिल सकता है। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे मंडी रेट पर नजर रखें और सही समय पर बिक्री करें ताकि बेहतर मुनाफा कमा सकें।